25 अगस्त 2020 - 12:21
आयत क्या कहती हैं? ईश्वर ने लोगों के सामने कोई तर्क नहीं छोड़ा और सत्य का मार्ग उन्हें दिखा दिया है।

मेरा दायित्व ईश्वरीय संदेश को तुम तक पहुंचाना, उसका प्रचार करना तथा उसकी ओर निमंत्रण देना है और उसे स्वीकार करने हेतु तुम्हें विवश करने का मुझे अधिकार नहीं है।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 108  का अनुवादः

(हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि हे लोगों! तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम तक सत्य पहुंच चुका है तो जो कोई मार्गदर्शन प्राप्त करेगा वह अपने लाभ के लिए ही मार्गदर्शन प्राप्त करेगा और जो कोई पथभ्रष्ट होगा वह अपने अहित में ही पथभ्रष्ट होगा, और तुम्हारा संरक्षक नहीं हूं (कि तुम्हें ज़बरदस्ती सत्य के मार्ग पर ले आऊं)।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

यह जान लोग कि तुम्हारे ईमान लाने या कुफ़्र का चयन करने से मुझे या ईश्वर को कोई लाभ नहीं होगा बल्कि इसका लाभ या हानि स्वयं तुम्हारे लिए है क्योंकि ईश्वर को तुम्हारी कोई आवश्यकता नहीं है और मैंने भी अपने दायित्व का पालन कर दिया है और तुम्हारे ईमान लाने या न लाने के संबंध में मेरा कोई दायित्व नहीं है।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. ईश्वर ने लोगों के सामने कोई तर्क नहीं छोड़ा और सत्य का मार्ग उन्हें दिखा दिया है, उस मार्ग पर चलना या न चलना लोगों के अपने हाथ में है।

  2. धर्मगुरूओं और धर्म के प्रचारकों का दायित्व अपनी बातें मानने और उन पर कर्मबद्ध होने के लिए लोगों को विवश करना नहीं बल्कि उनका मार्ग दर्शन करना और उन्हें उपदेश देना है